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धान खरीद शुरू न होने पर किसानों का फूटा गुस्सा, हाईवे पर बैठकर लगाया जाम,खरीद तत्काल शुरू कराने की मांग

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रुद्रपुर। धान की सरकारी खरीद शुरू न होने से आक्रोशित किसानों का आंदोलन मंगलवार को उग्र हो गया। जिले भर से गल्ला मंडी में एकत्र हुए सैकड़ों किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के मौके पर न पहुँचने से नाराज होकर हाईवे पर जाम लगा दिया। सड़क पर किसानों के बैठते ही वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिसमें कई स्कूली बसें और व्यावसायिक वाहन घंटों फंसे रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी  विभव सैनी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान तत्काल खरीद शुरू करने की मांग पर अड़े रहे।

धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से नाराज किसानों का आंदोलन मंगलवार को उग्र हो गया। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान गल्ला मंडी में एकत्र हुए और सरकारी क्रय केंद्रों पर तत्काल धान खरीद शुरू कराने की मांग को लेकर धरना दिया। काफी देर तक प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर पहुंचकर किसानों की समस्याएं सुनने और ज्ञापन लेने का इंतजार किया गया, लेकिन जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो किसानों का आक्रोश बढ़ गया। इसके बाद किसान मंडी से बाहर निकलकर हाईवे पर पहुंच गए और सड़क की एक साइड पर बैठकर जाम लगा दिया। किसानों के हाईवे पर बैठने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में कई स्कूली बसें, ट्रक और अन्य वाहन फंस गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस क्षेत्राधिकारी विभव सैनी ने किसानों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद तत्काल शुरू कराने की मांग पर अड़े रहे। किसानों का कहना है कि जिले में धान की कटाई तेजी से चल रही है और करीब 50 प्रतिशत धान बाजार में पहुंच चुका है। इसके बावजूद सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद व्यवस्था पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। किसानों के अनुसार कहीं पोर्टल में तकनीकी समस्या बताई जा रही है तो कहीं श्रमिकों की कमी का हवाला दिया जा रहा है। इससे किसानों के सामने तैयार फसल बेचने की समस्या खड़ी हो गई है। किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी व्यापारियों के हाथों धान बेचना पड़ रहा है। किसानों के मुताबिक उन्हें करीब 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकारी समर्थन मूल्य की तुलना में कम कीमत मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई किसानों के सामने खेतों में तैयार खड़ी फसल की कटाई का भी संकट है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर धान की खरीद की व्यवस्था नहीं हुई तो कटाई के बाद फसल के भंडारण और बिक्री की समस्या और बढ़ सकती है। किसानों ने आरोप लगाया कि वे पिछले कई दिनों से शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं और जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी या किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने तथा ज्ञापन लेने का इंतजार कर रहे थे। किसानों के अनुसार प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसी के विरोध में उन्होंने हाईवे जाम करने का निर्णय लिया। किसान नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि 15 से 20 मिनट के भीतर कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत नहीं करता और धान खरीद शुरू कराने को लेकर ठोस आश्वासन नहीं देता है, तो हाईवे की दूसरी साइड भी जाम कर दी जाएगी। किसानों की चेतावनी के बाद मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए किसानों से बातचीत जारी रखी। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सलविंदर सिंह कलसी, तराई संघ के किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह विर्क और किसान नेता ठाकुर जगदीश सिंह ने कहा कि किसानों की मांग नई नहीं है। किसान अपनी उपज का उचित मूल्य चाहते हैं और सरकार को सरकारी खरीद व्यवस्था तत्काल सुचारू करनी चाहिए। किसानों ने प्रशासन और सरकार से पोर्टल संबंधी तकनीकी समस्याओं को दूर करने, पर्याप्त संख्या में श्रमिकों की व्यवस्था करने और सभी सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद तत्काल शुरू कराने की मांग की। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। हाईवे जाम के कारण यातायात प्रभावित होने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब प्रशासन के सामने किसानों की नाराजगी दूर करने के साथ-साथ सरकारी खरीद व्यवस्था को जल्द पटरी पर लाने की चुनौती है।