भक्ति, आस्था और परंपरा के अनूठे संगम के साथ आज पावन पर्व अक्षय तृतीया पर उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। हिमालय की गोद में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट आज श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, जिससे पूरा क्षेत्र 'हर-हर गंगे' और 'जय माँ यमुना' के जयघोष से गुंजायमान है।
देवभूमि उत्तराखंड में पवित्र अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर आज से विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा का विधिवत आगाज हो गया। यात्रा की शुरुआत के साथ ही श्रद्धा, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट विधिविधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। निर्धारित शुभ मुहूर्त में गंगोत्री मंदिर के कपाट दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर खुले, जबकि यमुनोत्री मंदिर के कपाट 12 बजकर 35 मिनट पर दर्शनार्थियों के लिए खोले गए। इस दौरान दोनों धामों को कई क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। मंदिर परिसर ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय मां यमुना’ के जयघोष से गूंज उठा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यात्रा के शुभारंभ से पहले ही धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए मां यमुना की उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल खरशाली गांव से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। समेश्वर देवता की अगुवाई में निकली इस डोली यात्रा के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने भावुक होकर मां यमुना को विदा किया। ढोल-नगाड़ों, मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच यह यात्रा आगे बढ़ी, जिसने हर किसी को भक्ति में सराबोर कर दिया। परंपरा के अनुसार, ग्रामीण पैदल ही डोली के साथ धाम तक जाते हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का प्रतीक है।
इसी तरह मां गंगा की भोगमूर्ति की डोली भी शीतकालीन निवास मुखबा गांव से गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई। अभिजीत मुहूर्त में आर्मी बैंड और ढोल-दमाऊं की धुनों के बीच यह यात्रा शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां गंगा को छह माह के प्रवास के लिए विदा किया। चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। यात्रा मार्गों और धामों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस विभाग ने पूरे क्षेत्र को दो सुपरजोन, 12 जोन और 30 सेक्टर में बांटकर अधिकारियों की तैनाती की है। यात्रा मार्गों पर 6 थाने, 9 रिपोर्टिंग चौकियां, 13 सीजनल चौकियां और 12 पर्यटन पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत दो अपर पुलिस अधीक्षक, 5 राजपत्रित अधिकारी, 15 निरीक्षक, 135 उपनिरीक्षक, 150 हेड कांस्टेबल, 250 कांस्टेबल, 20 महिला कांस्टेबल, 140 होमगार्ड और 500 पीआरडी जवानों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पीएसी, एटीएस, बीडीएस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस और सीपीयू की विशेष टीमें भी मुस्तैद हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धामों में खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। विभिन्न स्थानों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों, मेडिकल ऑफिसरों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है। हीना और दोबाटा जैसे स्क्रीनिंग प्वाइंट्स पर स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है, जहां दो शिफ्ट में मेडिकल टीम तैनात रहेगी। यात्रा मार्गों पर होटल, धर्मशालाएं और दुकानें पूरी तरह तैयार हैं। पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा में शामिल होंगे। चारधाम यात्रा का यह शुभारंभ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा।

