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अनुष्ठान शुल्क में पारदर्शिता: अधिक शुल्क वसूलने की समस्याओं को रोकने के लिए बीकेटीसी वेबसाइट सभी धार्मिक समारोहों की आधिकारिक कीमतें स्पष्ट करेगी

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देहरादून। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) इस वर्ष की चारधाम यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने की तैयारी में जुट गई है। देश-दुनिया से आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए बीकेटीसी अपनी आधिकारिक वेबसाइट को पूरी तरह से 'अपग्रेड' (उच्चीकृत) कर रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को धामों में होने वाली विशेष पूजाओं, उनके शुल्क और ठहरने की व्यवस्था के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

बीकेटीसी के अधीन केवल बदरीनाथ और केदारनाथ धाम ही नहीं, बल्कि कुल 47 मंदिर आते हैं। इन सभी मंदिरों में पूजा-अर्चना, दर्शन और प्रबंधन का जिम्मा मंदिर समिति के पास है। वर्तमान में बीकेटीसी की एक वेबसाइट संचालित है, लेकिन पिछले कई वर्षों से इसे अपडेट नहीं किया गया है। पुराने डेटा और तकनीकी खामियों के कारण बाहरी राज्यों और विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा बुकिंग या अन्य जानकारियों के लिए भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या को देखते हुए मंदिर समिति ने अब इसे आधुनिक स्वरूप देने का निर्णय लिया है। बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि वेबसाइट को उच्चीकृत करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि यात्रा शुरू होने से पहले यह पोर्टल पूरी तरह क्रियाशील हो जाए। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को न केवल मंदिरों में पूजा व्यवस्था की जानकारी मिलेगी, बल्कि बीकेटीसी के विश्राम गृहों (गेस्ट हाउस) की उपलब्धता, विशेष पूजा शुल्क और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। अक्सर देखा गया है कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में 'महाभिषेक', 'स्वर्ण आरती' या अन्य विशेष पूजाओं के लिए बुकिंग की प्रक्रिया को लेकर श्रद्धालु असमंजस में रहते थे। अब वेबसाइट पर प्रत्येक पूजा का विवरण और उसका निर्धारित शुल्क स्पष्ट रूप से अंकित होगा। साथ ही, मंदिर समिति के विश्राम गृहों की जानकारी मिलने से यात्रियों को ठहरने की योजना बनाने में आसानी होगी। इस डिजिटल पहल को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 'स्मार्ट और सुगम यात्रा' के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। समिति का मानना है कि वेबसाइट के अपडेट होने से भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर लगाम लगेगी, क्योंकि श्रद्धालु सीधे आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से शुल्क जमा कर सकेंगे। बीकेटीसी के अधिकारियों के अनुसार, वेबसाइट के नए इंटरफेस को यूजर-फ्रेंडली बनाया जा रहा है ताकि बुजुर्ग और कम तकनीक जानने वाले लोग भी इसका आसानी से उपयोग कर सकें। यात्रा सीजन शुरू होने से पहले इस डिजिटल द्वार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा, जिससे देवभूमि आने वाले करोड़ों भक्तों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।