Breaking News :

शिशु और मातृ स्वास्थ्य पर विशेष फोकस, उत्तराखंड के स्वास्थ्य संकेतकों ने राष्ट्रीय औसत को दी चुनौती

Blog
 Image

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आगामी 9 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र से पहले नियोजन विभाग की ओर से तैयार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट पेश की जाएगी। इससे पहले नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने प्रेस वार्ता में रिपोर्ट से जुड़े प्रमुख आंकड़े साझा किए। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण राज्य के विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसके आधार पर सरकार यह तय करती है कि किन क्षेत्रों में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस बार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को और अधिक वैज्ञानिक और व्यापक बनाने के लिए ‘नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ की भी मदद ली गई है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में उत्तराखंड की नॉमिनल जीएसडीपी बढ़कर 3,81,880 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। जबकि वर्ष 2021-22 में यह 2.54 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग डेढ़ गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 की तुलना में 2025-26 में जीएसडीपी की वृद्धि दर 7.23 प्रतिशत दर्ज की गई है। आने वाले वर्ष में यह वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में जहां प्रति व्यक्ति आय 1.94 लाख रुपये थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 2,73,921 रुपये हो गई है। इसी के साथ राज्य में गरीबी सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में जहां गरीबी सूचकांक 9.70 था, वह वर्ष 2025 में घटकर 6.92 पर आ गया है। इसके अलावा श्रम भागीदारी दर भी 60.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उद्योग और उद्यमिता के क्षेत्र में भी राज्य ने तेजी से प्रगति की है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक वर्ष 2022 में राज्य में एमएसएमई इकाइयों की संख्या 59,798 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 79,394 हो गई है। इन इकाइयों के माध्यम से रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्ष 2022 में जहां 3.43 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा था, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 4.56 लाख से अधिक हो गई है। इसी तरह बड़े उद्योगों की संख्या भी 107 से बढ़कर 128 हो गई है। राज्य में स्टार्टअप की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जो 2022 में 702 थी और 2025 में बढ़कर 1,750 तक पहुंच गई है। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2022 में राज्य में सड़कों की कुल लंबाई 50,393 किलोमीटर थी, जो 2025 में बढ़कर 51,278 किलोमीटर हो गई है। इसी तरह हेलीपोर्ट की संख्या दो से बढ़कर सात और हेलीपैड की संख्या 60 से बढ़कर 118 तक पहुंच गई है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। प्राइमरी स्कूलों में ग्रॉस एनरोलमेंट रेट 91.19 प्रतिशत से बढ़कर 103 प्रतिशत हो गया है, जबकि सेकेंडरी स्कूलों में यह 88.23 प्रतिशत से बढ़कर 93.54 प्रतिशत हो गया है। वहीं स्कूलों में ड्रॉपआउट दर में कमी आई है। प्राइमरी स्तर पर यह 1.64 प्रतिशत से घटकर 1.41 प्रतिशत और सेकेंडरी स्तर पर 7.65 प्रतिशत से घटकर 4.59 प्रतिशत रह गई है। राज्य में डिग्री कॉलेजों की संख्या 124 से बढ़कर 139 हो गई है, जबकि इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 20 से बढ़कर 52 तक पहुंच गई है। ऊर्जा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में जहां विद्युत उत्पादन 5,157 मिलियन यूनिट था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 16,500 मिलियन यूनिट हो गया है। बिजली की खपत भी 12,518 मिलियन यूनिट से बढ़कर 17,192 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है। सौर ऊर्जा उत्पादन भी 439 मेगावाट से बढ़कर 1,027 मेगावाट हो गया है। स्वास्थ्य संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। शिशु मृत्यु दर 22 से घटकर 20 हो गई है, जबकि मातृ मृत्यु दर 103 से घटकर 91 तक पहुंच गई है। राज्य में औसत जीवन प्रत्याशा भी 71.7 वर्ष से बढ़कर 73 वर्ष हो गई है। कृषि और अन्य क्षेत्रों में भी उत्पादन बढ़ा है। वर्ष 2022 में जहां चावल और गेहूं का उत्पादन 28.23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, वह 2025 में बढ़कर 32.47 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है। औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का क्षेत्र 900 हेक्टेयर से बढ़कर 10 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। दुग्ध उत्पादन 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 54.59 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है, जबकि मछली उत्पादन 7,325 टन से बढ़कर 10,487 टन प्रति वर्ष हो गया है। पर्यटन क्षेत्र में भी वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2022 में राज्य में होटलों की संख्या 8,225 थी, जो 2025 में बढ़कर 10,509 हो गई है। वहीं होमस्टे की संख्या 3,935 से बढ़कर 6,061 तक पहुंच गई है। कुल मिलाकर आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि उत्तराखंड में आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और राज्य की अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूती की ओर बढ़ रही है।