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बद्री गाय के संरक्षण से मत्स्य पर्यटन तक: भराड़ीसैंण में 30 करोड़ की परियोजना को मंजूरी, सौरभ बहुगुणा ने दिए निर्देश

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देहरादून। उत्तराखंड की स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उत्तराखंड की शान मानी जाने वाली 'बद्री गाय' के संरक्षण और नस्ल सुधार के लिए चमोली जिले के भराड़ीसैंण में जल्द ही 30 करोड़ रुपये की लागत से एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की जाएगी। सचिवालय में आयोजित पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने यह बड़ा ऐलान किया।

उत्तराखंड की पारंपरिक पशुधन नस्लों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने नई पहल की तैयारी शुरू कर दी है। भराड़ीसैंण में बद्री गाय के संरक्षण और नस्ल सुधार के लिए करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से नई परियोजना शुरू की जाएगी। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस दिशा में तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए। सचिवालय में आयोजित पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की स्थानीय पशुधन नस्लों को संरक्षित करने के साथ ही पशुपालकों को योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। बद्री गाय उत्तराखंड की पारंपरिक और पहाड़ी परिस्थितियों के अनुकूल नस्लों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना के जरिए इसके संरक्षण के साथ नस्ल सुधार पर भी काम किया जाएगा। बैठक में पशुधन विकास से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने गंगा गाय योजना को अधिक किसान अनुकूल बनाने पर जोर दिया। उद्देश्य यह है कि योजनाओं का लाभ कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहकर वास्तविक रूप से पशुपालकों तक पहुंचे। इसके लिए विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन को सरल और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। सरकार की योजना पशुपालन के साथ मत्स्य पालन को भी ग्रामीण आय के नए माध्यम के रूप में विकसित करने की है। मंत्री ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को तेज गति से लागू करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही ट्राउट प्रोत्साहन योजना को भी गति देने पर जोर दिया गया। पर्वतीय क्षेत्रों में ट्राउट उत्पादन को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विभाग काम कर रहा है। चमोली जिले के बैरांगना में ग्रामीण पर्यटन का नया प्रारूप विकसित करने की योजना है। इसमें मछली पकड़ने से जुड़े पर्यटन, स्थानीय जलपान गृह और क्षेत्रीय उत्पादों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। यानी पर्यटक यहां प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के साथ स्थानीय खानपान और उत्पादों से भी जुड़ सकेंगे। इस मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मछली उत्पादों की सीधी बिक्री व्यवस्था होगी। विभाग की योजना ऐसी विपणन श्रृंखला तैयार करने की है, जो मछली उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़े। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और उत्पादकों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन और मत्स्य पालन लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। अब इन्हें पर्यटन से जोड़कर आय के अतिरिक्त अवसर तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। बद्री गाय के संरक्षण से जहां पारंपरिक पशुधन को बचाने की कोशिश होगी, वहीं मत्स्य पालन और फिशिंग टूरिज्म को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने की योजना है। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और पशुधन विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इससे पहले अपर सचिव संतोष बडोनी ने विभागीय मंत्री का अभिनंदन किया। बैठक में पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार की इन पहलों का अगला महत्वपूर्ण चरण इनके जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। बद्री गाय संरक्षण परियोजना, किसान अनुकूल पशुधन योजनाएं और बैरांगना का फिशिंग टूरिज्म मॉडल यदि प्रभावी ढंग से लागू होते हैं तो पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन, मत्स्य पालन और ग्रामीण पर्यटन को एक-दूसरे से जोड़कर स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।