देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश’ के संकल्प को धरातल पर उतारने में 'रीप-ग्रामोत्थान' परियोजना एक क्रांतिकारी माध्यम साबित हो रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिससे न केवल उनका सामाजिक स्तर ऊंचा उठ रहा है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश’ के संकल्प को धरातल पर उतारने में रीप-ग्रामोत्थान परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तराखंड की महिलाएं स्वरोजगार और स्थानीय संसाधनों पर आधारित गतिविधियों के जरिए अपनी आय बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। महिला समूहों के माध्यम से विभिन्न स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से गांवों में रोजगार के अवसर भी विकसित हो रहे हैं। रीप-ग्रामोत्थान परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को मजबूत करना और महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है। इसके तहत महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे महिलाएं अपने हुनर और स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर आय के साधन विकसित कर रही हैं। परियोजना के जरिए महिला समूहों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से इसका प्रभाव केवल परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। सरकार का जोर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उन्हें ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर है। महिला सशक्तीकरण को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए रीप-ग्रामोत्थान परियोजना ग्रामीण उत्तराखंड में आजीविका के नए अवसर तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री के ‘सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश’ के संकल्प के तहत महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रदेश के समग्र विकास से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका पारिवारिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाली बन रही है।

