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उत्तराखंड विस चुनाव के लिए चुनाव आयोग का 'मेगा प्लान': 130 बूथों की कमान संभालेंगी महिलाएं, बनेंगे 92 मॉडल पोलिंग स्टेशन

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देहरादून। उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष, समावेशी और सुगम बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन विभाग ने एक बड़ा और व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। इस बार के चुनावों में न केवल आधुनिक जनसुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा, बल्कि महिला सशक्तीकरण और समावेशी लोकतंत्र की एक बेहद मजबूत तस्वीर भी देखने को मिलेगी। आयोग की योजना के अनुसार, प्रदेश भर के 130 से अधिक मतदान केंद्रों की पूरी कमान महिला मतदान कार्मिकों के हाथों में होगी। इसके साथ ही मतदाताओं को एक सुखद अनुभव देने के लिए राज्य में 92 मॉडल पोलिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियों का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। आगामी चुनाव में महिला सशक्तीकरण, दिव्यांगजनों की भागीदारी और मतदाताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस बार प्रदेश में 130 मतदान केंद्रों की कमान महिलाओं को सौंपने की योजना है। इसके साथ ही 92 मॉडल मतदान केंद्र और दिव्यांग कार्मिकों के संचालन में 66 विशेष मतदान केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। इन व्यवस्थाओं के जरिए निर्वाचन आयोग मतदान प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और समावेशी बनाने की तैयारी में है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 79 मतदान केंद्र पूरी तरह महिला कार्मिकों के जिम्मे थे। आगामी चुनाव के लिए इस संख्या को बढ़ाकर 137 महिला मतदान केंद्र करने का प्रस्ताव बताया गया है। इससे चुनावी व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और महिला कार्मिकों को निर्वाचन प्रक्रिया के संचालन में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलेगी। वहीं, 92 मॉडल मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इन केंद्रों को सामान्य मतदान केंद्रों से अलग सुविधाजनक स्वरूप देने की तैयारी है। दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष व्यवस्था प्रस्तावित है। दिव्यांग कार्मिकों के संचालन में 66 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इसका उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रिया में दिव्यांगजनों की सक्रिय भूमिका को बढ़ावा देना है। प्रदेश में कुल 12,543 मतदान केंद्र निर्धारित किए गए हैं। इनमें कई मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां तक पहुंचना निर्वाचन कर्मचारियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने मतदान दलों की रवानगी का कार्यक्रम भी तैयार किया है। प्रदेश में तीन मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां पहुंचने के लिए 20 किलोमीटर से अधिक पैदल दूरी तय करनी पड़ेगी। इनमें उत्तरकाशी के दो और चमोली का एक मतदान केंद्र शामिल है। इसके अलावा आठ मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए 10 से 15 किलोमीटर तथा 23 मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए आठ से 10 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़नी होगी। इन परिस्थितियों को देखते हुए 12 मतदान दलों को तीन दिन पहले और 665 मतदान दलों को दो दिन पहले रवाना किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के सामने वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी बड़ी जिम्मेदारी है। एक जुलाई 2026 की स्थिति के अनुसार प्रदेश में 100 वर्ष से अधिक आयु के 910 मतदाता पंजीकृत हैं। वहीं, 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ मतदाताओं की संख्या 48,558 है। प्रदेश में 76,216 दिव्यांग मतदाता भी मतदाता सूची में शामिल हैं, जबकि थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 212 दर्ज की गई है। आदिम जनजातियों के मतदाता पंजीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वनराजि और बुक्सा जनजाति के 18 वर्ष से अधिक आयु के कुल 25,676 पात्र नागरिकों में से अब तक 13,053 का मतदाता पंजीकरण पूरा किया जा चुका है।  वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड में केवल मतदान की तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला नेतृत्व, दिव्यांगजनों की भागीदारी, वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा और दूरस्थ क्षेत्रों तक लोकतंत्र की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण होगा। अब इन योजनाओं को धरातल पर उतारना निर्वाचन तंत्र के सामने अहम चुनौती रहेगी।