देहरादून। उत्तराखंड में मौसम के बिगड़े मिजाज ने एक बार फिर से भारी तबाही की आशंका बढ़ा दी है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून द्वारा प्रदेश में आगामी दो दिनों के लिए जारी 'रेड अलर्ट' को देखते हुए राज्य का प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी संबंधित जिलों, शासन के आला अधिकारियों और आपदा प्रबंधन महकमे को अगले 24 घंटे हाई अलर्ट मोड पर रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड में मानसून की विदाई से पहले मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी के बीच मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। शनिवार और रविवार को मौसम के अधिक सक्रिय रहने की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन से वार्ता कर सभी संबंधित जिलों और विभागों को एहतियाती कदम उठाने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। मौसम विभाग ने 26 और 27 सितंबर को उत्तराखंड में अत्यंत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है। मुख्यमंत्री धामी ने संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने, जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों को सक्रिय रखने और मौसम संबंधी चेतावनियों को तत्काल स्थानीय स्तर तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों से संबंधित सभी तैयारियां पहले से सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशासन बिना देरी के कार्रवाई कर सके। मौसम विभाग के अनुसार 27 सितंबर को देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा भी हो सकती है। वहीं नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना के चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। शनिवार यानी 26 सितंबर को भी प्रदेश के कई जिलों में मौसम बेहद खराब रहने का अनुमान है। बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि देहरादून, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोड़ा में ऑरेंज अलर्ट है। लगातार बारिश के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में नदी-नालों और बरसाती गदेरों का जलस्तर बढ़ने तथा जलभराव की स्थिति पैदा होने की आशंका है। प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के साथ आवश्यक मशीनरी और राहत-बचाव दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग ने 28 सितंबर को भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का असर और अधिक दिखाई दे सकता है। 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की भी संभावना जताई गई है। खराब मौसम को देखते हुए चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से भी मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है। भारी बारिश की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षा के मद्देनजर निकटतम होल्डिंग क्षेत्र में रोके जाने की व्यवस्था भी रखी गई है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने लोगों से खराब मौसम में नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों की ओर नहीं जाने की अपील की है। संबंधित अधिकारियों को आपदा प्रबंधन सेवाओं को तत्पर रखने और किसी भी घटना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। हरिद्वार जिला प्रशासन ने भी आपात स्थिति में तत्काल सूचना देने की अपील की है। इसके लिए जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के नंबर 01334-223999, 1077 (टोल फ्री), 7055258800 और 9528250926 जारी किए गए हैं। अपर जिलाधिकारी वैभव गुप्ता ने बताया कि मौसम की चेतावनी को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पेयजल और विद्युत विभाग समेत आवश्यक सेवाओं के बीच समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया है। मौसम का यह दौर उत्तराखंड के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सितंबर का अंतिम सप्ताह मानसून की विदाई की ओर बढ़ने का समय होता है। ऐसे में अचानक सक्रिय हुई बारिश से पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ सकती है। फिलहाल सरकार और प्रशासन का पूरा फोकस संभावित आपदा से पहले तैयारी मजबूत करने और जनहानि को रोकने पर है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चेतावनी को हल्के में न लिया जाए और हर स्तर पर सतर्कता बरती जाए।

