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ऋषिकेश और रायपुर में मतदाता पहचान की बड़ी चुनौती, चुनाव आयोग ने बीएलओ को दिए सख्त दिशा-निर्देश

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देहरादून। उत्तराखंड के मैदानी इलाकों की 15 महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर कुल मतदाताओं में से 20 प्रतिशत से ज्यादा का पता ही नहीं चल पा रहा है। इससे सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस दोनों ही दलों की चिंता बढ़ गई है। विशेषकर 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह स्थिति दोनों प्रमुख दलों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

उत्तराखंड निर्वाचन आयोग के प्री-एसआईआर (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) के दौरान यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। इन 15 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 23,33,278 मतदाता हैं, जिनमें से केवल 17,41,235 मतदाताओं का ही 2003 की वोटर लिस्ट से मिलान (मैपिंग) हो पाया है। बाकी 5,92,043 मतदाताओं (लगभग 25.37%) का कोई अता-पता नहीं है। इनमें सबसे ज्यादा चिंता देहरादून जिले की 10 सीटों को लेकर है, जहां 10 में से 9 सीटों पर मतदाताओं की मैपिंग मात्र 80 प्रतिशत से भी नीचे है। ये 15 सीटें हैं - रुद्रपुर, धर्मपुर, मसूरी, राजपुर रोड, देहरादून कैंट, ऋषिकेश, काशीपुर, रायपुर, डोईवाला, विकासनगर, सहसपुर, किच्छा, नानकमत्ता, जसपुर और बाजपुर। इन क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश मतदाता या तो पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन कर आए हैं या फिर दूसरे राज्यों (विशेषकर उत्तर प्रदेश) से आकर बसे हैं। अंदेशा है कि ये लोग अपना वोट अपने मूल गांव या जिले में ही रखना चाहते हैं, जिससे मैदानी क्षेत्रों में वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी पैदा हो गई है।
सीट-वार स्थिति (कुछ प्रमुख आंकड़े):

रुद्रपुर : 69.32% मैपिंग (62,861 बचे)
धर्मपुर : 70% मैपिंग (58,221 बचे)
मसूरी : 70.58% मैपिंग
देहरादून कैंट : 71.07% मैपिंग
ऋषिकेश : 72.72% मैपिंग

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर एसआईआर (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) के दौरान इन मतदाताओं को सही ढंग से चिन्हित नहीं किया गया तो इनके वोट कटने का खतरा मंडरा रहा है। इससे दोनों प्रमुख दलों की चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है। भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा, “हमने एसआईआर की पूरी तैयारी शुरू कर दी है। हर पन्ना प्रमुख तक पहुंच बनाकर सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी वैध मतदाता छूट न जाए। कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा, “हम किसी भी सूरत में वैध मतदाता का नाम कटने और अवैध मतदाता का नाम जोड़े जाने नहीं देंगे। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि एक मतदाता का नाम केवल एक ही वोटर लिस्ट में हो। दोनों दल अब अपने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारकर एक-एक मतदाता तक पहुंच बनाने की कवायद में जुट गए हैं। विशेषकर देहरादून और ऊधम सिंह नगर जिले की इन सीटों पर पन्ना प्रमुखों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है।