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हिमालयी धरोहर और आत्मनिर्भरता का अनूठा संगम: केदारनाथ की मातृशक्ति ने भोजपत्र से बनाईं विशेष राखियां, पीएम मोदी और सीएम धामी को भेजा रक्षासूत्र

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रुद्रप्रयाग। हिमालय की पावन धरती पर सदियों से संरक्षित लोक परंपरा, संस्कृति और आधुनिक आत्मनिर्भरता का एक अद्भुत संगम इस बार रक्षाबंधन के पर्व पर देखने को मिला है। केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र की मातृशक्ति ने स्थानीय हिमालयी भोजपत्र का उपयोग कर बेहद खूबसूरत और कलात्मक राखियां तैयार की हैं। इन विशेष राखियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को रक्षासूत्र के रूप में भेजा गया है।

केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के कुशल नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा शुरू की गई इस अनोखी पहल ने न केवल स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक हुनर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है, बल्कि 'वोकल फॉर लोकल' और महिला आत्मनिर्भरता का एक सशक्त संदेश भी दिया है।रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ विकासखंड सभागार में 'मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना' के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को भोजपत्र से कलात्मक राखी तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान महिलाओं ने भोजपत्र जैसे पौराणिक, पारंपरिक और स्थानीय प्राकृतिक संसाधन को अपनी रचनात्मक क्षमता से सजाकर बेहद आकर्षक राखियों का रूप दिया। विधायक की उपस्थिति में इन निर्मित राखियों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को सप्रेम प्रेषित किया गया। इस अवसर पर केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर उतारा जा रहा है। राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं का सीधा लाभ अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं तक पहुंच रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पहाड़ की महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। विधायक ने कहा, "पहाड़ की मातृशक्ति के पास प्रतिभा और हुनर की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता बस उनके हुनर को सही मंच और बाजार से जोड़ने की है। भोजपत्र से राखी बनाने की यह पहल इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। इससे महिलाओं की रचनात्मकता को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही हमारी लोककला, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने आगे बताया कि भोजपत्र उत्तराखंड की अनमोल हिमालयी विरासत से जुड़ा एक बेहद पवित्र प्राकृतिक संसाधन है। सदियों से इसका उपयोग हमारे धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों में होता आया है। आज उसी पौराणिक धरोहर को हमारी बहनों ने अपने हुनर के दम पर आजीविका से जोड़कर एक नया और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है। केदारनाथ विधायक ने जोर देकर कहा कि रक्षाबंधन केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि प्रेम, सुरक्षा, विश्वास और संकल्प का पावन पर्व है। केदारनाथ क्षेत्र की बहनों द्वारा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजी गई यह भोजपत्र की राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि देवभूमि की पावन संस्कृति, पहाड़ की नारी शक्ति के अप्रतिम हुनर और सशक्त उत्तराखंड की भावना का प्रतीक है। आज राज्य की महिलाएं स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण और निर्माण से अपनी आजीविका संवारते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं।