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मतदाता सूची विवाद पर कांग्रेस का हल्ला बोल: 1 नवंबर को दिल्ली में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली

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देहरादून। लोकतंत्र की बुनियाद मानी जाने वाली मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और बड़े पैमाने पर वोट काटे जाने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस गंभीर विषय पर जन-आक्रोश व्यक्त करने और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था की मांग को लेकर आगामी 1 नवंबर को राजधानी दिल्ली में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली का आयोजन किया जा रहा है।

मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र और निर्वाचन व्यवस्था को घेरने की तैयारी की है। पार्टी की ओर से एक नवंबर को दिल्ली में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की जाएगी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार ने दावा किया कि इस रैली में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल होंगे। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। अजय कुमार के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 13 करोड़ 14 लाख, मध्य प्रदेश में 34 लाख, ओडिशा में 20 लाख और उत्तराखंड में 8.02 लाख मतदाताओं के नाम एसआईआर के तहत काटे गए हैं। कांग्रेस नेता ने इन आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के मामले को प्रमुखता से उठाने की बात कही है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों और नाम हटाए जाने के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में नाम शामिल होना प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। पार्टी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने और रैली के माध्यम से अपनी आपत्तियां उठाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कार्यक्रम में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और इससे प्रभावित होने की आशंका वाले मतदाताओं के सवाल प्रमुख रहेंगे। अजय कुमार ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से दिल्ली पहुंचकर रैली में भाग लेने की अपील की है। पार्टी की रणनीति इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने और मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही की मांग करने की है। मतदाता सूची का शुद्धिकरण निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन नाम हटाने की कार्रवाई में नियमों का पालन और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा उठाए गए आरोपों के साथ संबंधित आधिकारिक आंकड़ों, नाम हटाने के कारणों और पुनरीक्षण की प्रक्रिया की जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी। एक नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली में कांग्रेस इस मुद्दे को किस तरह उठाती है और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर क्या मांगें रखती है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी। फिलहाल, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस के आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों पर बहस को फिर सामने ला दिया है।