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घोषणाएं करने में सबसे आगे निकले सीएम धामी: उत्तराखंड के इतिहास में वादे पूरे करने का रिकॉर्ड और स्ट्राइक रेट का पूरा सच

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देहरादून। उत्तराखंड के 25 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में घोषणाएं करने और उन्हें धरातल पर उतारने को लेकर सियासी गलियारों में अक्सर चर्चा होती रही है। इस फेहरिस्त में मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सर्वाधिक घोषणाएं करने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं। सरकारी सूत्रों के आंकड़ों के अनुसार, धामी ने न सिर्फ सबसे ज्यादा घोषणाएं की हैं, बल्कि वादों को अमलीजामा पहनाने के मामले में भी उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है।

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी घोषणाएं करने के मामले में नया रिकॉर्ड बना चुके हैं। राज्य के 25 साल के राजनीतिक इतिहास में धामी के नाम सबसे अधिक घोषणाएं करने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। बागेश्वर बाल विज्ञान महोत्सव और हल्द्वानी में आयोजित प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन में 11 नई घोषणाओं के साथ उनकी घोषणाओं की संख्या 4,621 के पार पहुंच गई है। हालांकि, इन घोषणाओं को पूरा करने की रफ्तार और अन्य मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में घोषणाओं पर हुई कार्रवाई के आंकड़े भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री धामी की 4,620 घोषणाओं में से 2,852 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1,397 घोषणाओं पर काम अंतिम चरण की ओर बताया जा रहा है। वहीं, 303 घोषणाएं लंबित हैं। इन आंकड़ों के आधार पर लगभग 62 प्रतिशत घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं और करीब 30 प्रतिशत पर काम जारी है। लंबित घोषणाओं को जल्द पूरा कराने के लिए मुख्य सचिव को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। घोषणाओं पर कार्रवाई के अनुपात के लिहाज से पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी का दूसरा कार्यकाल उल्लेखनीय रहा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 11 सितंबर 2011 से 13 मार्च 2012 तक के इस कार्यकाल में उन्होंने 33 घोषणाएं कीं और सभी पर कार्रवाई हुई। इस आधार पर उनका अनुपात 100 प्रतिशत रहा। हालांकि, यह आंकड़ा सीमित अवधि और कम संख्या में की गई घोषणाओं से जुड़ा है। खंडूड़ी के पहले कार्यकाल में 584 घोषणाएं की गई थीं, जिनमें से 303 पूरी हुईं। यह अंतर बताता है कि किसी मुख्यमंत्री के प्रदर्शन को समझने के लिए केवल प्रतिशत नहीं, बल्कि कुल घोषणाओं और पूरी हुई घोषणाओं की संख्या भी देखना जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 18 मार्च 2017 से 9 मार्च 2021 तक अपने कार्यकाल में 2,406 घोषणाएं की थीं। इनमें से 2,063 पर कार्रवाई हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यह करीब 85.7 प्रतिशत बैठता है। घोषणाओं की संख्या और उन पर हुई कार्रवाई के लिहाज से उनका कार्यकाल भी उल्लेखनीय रहा। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फरवरी 2014 में सत्ता संभालने के बाद 3,814 घोषणाएं कीं। इनमें से 2,201 पूरी हुईं, जो करीब 57.7 प्रतिशत है। विजय बहुगुणा ने 1,348 घोषणाएं की थीं, जिनमें से 680 पूरी हुईं। उनका अनुपात लगभग 50.4 प्रतिशत रहा। उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने 895 घोषणाएं की थीं, जिनमें 311 पूरी हुईं। रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल में 1,140 घोषणाओं में से 450 पूरी हुईं। तीरथ सिंह रावत ने 183 घोषणाएं कीं, जिनमें 90 पूरी हुईं। नित्यानंद स्वामी ने 33 और भगत सिंह कोश्यारी ने 11 घोषणाएं की थीं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की अवधि, घोषणाओं की संख्या और उन पर कार्रवाई का अनुपात अलग रहा है। इसलिए किसी एक मुख्यमंत्री को सबसे बेहतर घोषित करने के बजाय कुल घोषणाओं, पूरी हुई घोषणाओं और लंबित कार्यों को साथ रखकर देखना अधिक उपयोगी होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि भाजपा सरकार केवल बातें करने में विश्वास नहीं करती। जनहित में की गई घोषणाओं का शिलान्यास और फिर लोकार्पण भी किया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि दशकों से अटके काम भी अब आगे बढ़ रहे हैं। धामी सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती लंबित घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की है। 2,852 घोषणाओं के पूरा होने का दावा जहां सरकार की प्रगति को दर्शाता है, वहीं 303 लंबित घोषणाएं और 1,397 पर जारी काम यह भी बताते हैं कि निगरानी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है। आखिरकार, सरकार की घोषणाओं का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होगा कि उनका लाभ कितनी जल्दी और कितने प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचता है।