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विश्व आयुर्वेद दिवस पर देवभूमि से ऐतिहासिक पहल: हरिद्वार में देश के पहले 'पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम' का भव्य शुभारंभ

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हरिद्वार। विश्व आयुर्वेद दिवस और भगवान धन्वंतरि जयंती के पावन अवसर पर देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरा हरिद्वार एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। पतंजलि वेलनेस (योगग्राम) में देश के पहले 'पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम' का भव्य उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और योग गुरु स्वामी रामदेव की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। भारतीय ज्ञान-परंपरा, योग और आयुर्वेद की संप्रभुता को पुनः स्थापित करने की दिशा में इस गुरुकुलम का शुभारंभ एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

विश्व आयुर्वेद दिवस के अवसर पर हरिद्वार में भारतीय ज्ञान, आयुर्वेद, योग और आधुनिक शिक्षा के संगम की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पतंजलि वेलनेस योगग्राम में पहले पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में योग गुरु एवं पतंजलि के संस्थापक स्वामी रामदेव समेत आयुर्वेद और भारतीय शिक्षा परंपरा से जुड़े लोग मौजूद रहे। गुरुकुलम के शुभारंभ को भारतीय पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विश्व आयुर्वेद दिवस के दिन इस संस्थान का उद्घाटन होना विशेष अवसर है। उनके अनुसार भारतीय परंपराओं, आयुर्वेद और योग की विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग को दुनिया और घर-घर तक पहुंचाने के लिए जिन लोगों ने प्रयास किए, उनसे प्रेरणा लेते हुए भारतीय ज्ञान और परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने जिन जीवन पद्धतियों और परंपराओं को अपनाया, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद के आराध्य भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना भी की गई। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित पूजा में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद हरिद्वार में गुरुकुलम के उद्घाटन कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा और आयुर्वेद की परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। पतंजलि गुरुकुलम के अनुसार संस्थान भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध है और यहां पारंपरिक वैदिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा को भी शामिल किया गया है। संस्थान की वेबसाइट पर हरिद्वार स्थित गुरुकुलम में कक्षा चार से 12वीं तक की पढ़ाई का उल्लेख किया गया है। यानी गुरुकुलम की अवधारणा केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखी गई है। इसके माध्यम से वैदिक ज्ञान, भारतीय जीवन पद्धति, योग और आयुर्वेद जैसे विषयों के साथ आधुनिक शैक्षणिक व्यवस्था को जोड़ने का प्रयास किया गया है। शिक्षा के इस मॉडल के सामने चुनौती भी यही होगी कि परंपरा और आधुनिक ज्ञान के बीच ऐसा संतुलन तैयार किया जाए, जो विद्यार्थियों को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम बना सके। भारत की चिकित्सा और जीवन पद्धति में आयुर्वेद की अपनी लंबी परंपरा रही है। आधुनिक समय में आयुर्वेद और योग को लेकर देश-दुनिया में बढ़ती रुचि के बीच शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को इन परंपराओं से जोड़ने की पहल को अलग महत्व मिल रहा है। हरिद्वार लंबे समय से योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में यहां आयुर्वेद आधारित गुरुकुलम की शुरुआत को इसी व्यापक परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। उद्घाटन कार्यक्रम में भी इस बात पर जोर रहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत बनकर न रह जाए, बल्कि नई पीढ़ी उससे परिचित हो और उसे आधुनिक संदर्भ में समझे। गुरुकुलम की अवधारणा में शिक्षा के साथ संस्कार और भारतीय जीवन मूल्यों को भी महत्व दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे संस्थानों के सामने सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह होगी कि विद्यार्थियों को परंपरागत ज्ञान देने के साथ आधुनिक विज्ञान, तकनीक और समकालीन शिक्षा की आवश्यकताओं से भी जोड़ा जाए। विश्व आयुर्वेद दिवस पर हरिद्वार में हुए इस उद्घाटन ने एक बार फिर यह बहस सामने ला दी है कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के साथ किस तरह जोड़ा जाए। यदि यह प्रयास प्रभावी ढंग से आगे बढ़ता है तो गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच एक नया शैक्षणिक मॉडल विकसित करने की संभावना बन सकती है। फिलहाल पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम का शुभारंभ हरिद्वार की शिक्षा और आयुर्वेद परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ता है। मुख्यमंत्री धामी के शब्दों में कहें तो चुनौती केवल विरासत को संरक्षित करने की नहीं, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की भी है।