देहरादून। 38वें राष्ट्रीय खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 243 पदक विजेताओं के लिए लंबे समय से अटका ‘आउट ऑफ टर्न’ नौकरी का प्रस्ताव अब कैबिनेट में आने जा रहा है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को 25 फरवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक में रखने का आश्वासन दिया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों में मेजबान उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। खिलाड़ियों ने कुल 103 पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया। इनमें 24 स्वर्ण, 35 रजत और 44 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर उत्तराखंड ने पदक तालिका में सातवां स्थान हासिल किया था, जो अब तक का उल्लेखनीय परिणाम माना जा रहा है। प्रदेश सरकार ने नई खेल नीति में राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं के लिए ‘आउट ऑफ टर्न’ सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया है। इस नीति के तहत स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि के आधार पर सीधे सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जानी है। लेकिन राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को एक वर्ष पूरा होने के बावजूद अभी तक खिलाड़ियों को नियुक्ति नहीं मिल पाई है, जिससे खिलाड़ियों और उनके परिवारों में निराशा का माहौल था। खेल विभाग की ओर से बताया गया कि पदक विजेताओं की सूची तैयार कर प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेज दिया गया है। हालांकि यह प्रस्ताव काफी समय से लंबित पड़ा हुआ था। अब खेल मंत्री के बयान के बाद खिलाड़ियों को उम्मीद जगी है कि कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही नियुक्ति प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया है, ऐसे में उन्हें उनका हक मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भी इस विषय को गंभीरता से लिया है और शीघ्र निर्णय का भरोसा दिया है। खिलाड़ियों का कहना है कि नौकरी मिलने से न केवल उन्हें आर्थिक स्थिरता मिलेगी, बल्कि युवा पीढ़ी में खेलों के प्रति आकर्षण भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो प्रदेश में खेल संस्कृति को और मजबूती मिलेगी तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे। अब सबकी नजर 25 फरवरी की कैबिनेट बैठक पर टिकी है, जहां इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। यदि हरी झंडी मिलती है तो यह निर्णय प्रदेश के खेल इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

