उत्तराखंड के न्याय विभाग में डिजिटल क्रांति: ई-फॉरेंसिक 2.0 से लंबित मुकदमों के निस्तारण में मिलेगी मदद

Blog
 Image

उत्तराखंड में अब अपराधियों की खैर नहीं! प्रदेश की न्याय व्यवस्था और पुलिस तफ्तीश को हाईटेक बनाने की दिशा में धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में ई-फॉरेंसिक 2.0 पोर्टल की औपचारिक शुरुआत हो गई है। अब थाने में एफआईआर दर्ज होते ही फॉरेंसिक लैब से लेकर जेल और कोर्ट तक सभी विभाग एक साथ एक्टिव हो जाएंगे। पत्राचार और डाक के चक्कर में महीनों तक लटकने वाली जांच रिपोर्ट अब महज कुछ सप्ताह के भीतर एक 'क्लिक' पर उपलब्ध होगी।

उत्तराखंड में आपराधिक मामलों की जांच और न्याय प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा डिजिटल बदलाव किया गया है। राज्य में ‘ई-फॉरेंसिक 2.0’ प्रणाली की शुरुआत हो चुकी है, जिसके तहत अब थाने से लेकर फॉरेंसिक लैब, अभियोजन, कोर्ट और जेल तक सभी विभाग एक ही प्लेटफॉर्म से जुड़ गए हैं। इस नई व्यवस्था से जांच और सुनवाई की प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी हद तक कम हो जाएगा। देहरादून और रुद्रपुर स्थित फॉरेंसिक लैब में इस प्रणाली की औपचारिक शुरुआत की गई। देहरादून में डायरेक्टर फॉरेंसिक लैब डॉ. नीलेश आनंद भरणे और रुद्रपुर में प्रभारी संयुक्त निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने इस पहल को लॉन्च किया। डॉ. भरणे के अनुसार, यह सिस्टम अंतःप्रचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) के तहत विकसित किया गया है। इसके जरिए सीसीटीएनएस, ई-कोर्ट, ई-प्रिजन, अभियोजन और फॉरेंसिक लैब को एकीकृत कर दिया गया है। पहले किसी भी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने लेने, उन्हें लैब भेजने और रिपोर्ट तैयार होकर संबंधित विभागों तक पहुंचने में महीनों का समय लग जाता था। अब इस नई व्यवस्था में जैसे ही थाने में एफआईआर दर्ज होकर सीसीटीएनएस पर अपलोड होगी, उसकी जानकारी तुरंत फॉरेंसिक लैब तक पहुंच जाएगी। जब जांच के नमूने लैब में पहुंचेंगे, तो क्यूआर कोड के जरिए अधिकारी केस की पूरी जानकारी तुरंत देख सकेंगे। जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगी, जिसे अभियोजन और कोर्ट दोनों रियल टाइम में देख सकेंगे। इस डिजिटल सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कागजी प्रक्रिया और विभागों के बीच होने वाले पत्राचार में लगने वाला समय खत्म हो जाएगा। पहले जहां रिपोर्ट पहुंचने में महीनों लगते थे, अब वही काम कुछ ही हफ्तों में पूरा हो सकेगा। इससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी और लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा। देशभर में इस ई-फॉरेंसिक 2.0 प्रणाली से अब तक 105 फॉरेंसिक ऑफिस जुड़ चुके हैं, जिनमें उत्तराखंड की दोनों प्रमुख लैब भी शामिल हैं। राज्य में अब तक 24,328 जांच इस प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें देहरादून लैब की 17,434 और रुद्रपुर लैब की 6,894 जांच शामिल हैं। ई-फॉरेंसिक 2.0’ उत्तराखंड की न्याय व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।