केदारनाथ। विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में अब भक्ति का स्वरूप पूरी तरह लोकतांत्रिक और सुगम होगा। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने भारी भीड़ और आम भक्तों की सुविधा को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि धामों में फिलहाल विशेष पूजाओं पर रोक लगा दी गई है। अब मंदिर आने वाले सभी श्रद्धालु सामान्य पंक्ति में लगकर एक ही तरीके से दर्शन करेंगे, जिससे व्यवस्था सुगम और पारदर्शी बनी रहे। आज सुबह ब्रह्ममुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। परंपरा के अनुसार, धाम में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न की गई। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बदरी विशाल का आशीर्वाद लिया और राज्य की खुशहाली की कामना की। बाबा केदार और बदरी विशाल के द्वार खुलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने श्रद्धालुओं से एक अनोखा आग्रह करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान 'डिजिटल उपवास' रखें। यानी, मोबाइल और गैजेट्स से दूर रहकर हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति को जीने का प्रयास करें। पीएम ने कहा कि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य से लेकर रामानुजाचार्य तक ने इन धामों से भारतीय संस्कृति को दिशा दी है, और यह यात्रा 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का जीवंत उत्सव है।
प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से यात्रा को दिव्य और मर्यादित बनाने के लिए पांच संकल्प लेने का आह्वान किया है:
1. स्वच्छता सर्वोपरि: धाम और आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखें और सिंगल यूज प्लास्टिक का पूरी तरह त्याग करें।
2. प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता: हिमालय के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहें और 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे अभियानों से जुड़कर संरक्षण में योगदान दें।
3. सेवा और एकता: यात्रा के दौरान प्रतिदिन सेवा का कोई एक कार्य अवश्य करें। अन्य राज्यों के लोगों की परंपराओं का सम्मान कर राष्ट्रीय एकता को सशक्त करें।
4. वोकल फॉर लोकल: पीएम ने आग्रह किया कि अपनी यात्रा के कुल खर्च का कम से कम 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों को खरीदने पर खर्च करें, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
5. अनुशासन और मर्यादा: यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि प्रबंधन में लगे सुरक्षाकर्मियों को असुविधा न हो।
पीएम मोदी ने दोहराया कि यह दशक उत्तराखंड का है। पिछले कुछ वर्षों के विकास कार्यों ने चारधाम यात्रा को पहले से कहीं अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है। उन्होंने इंफ्लूएंसर्स और क्रिएटर्स से भी अपील की है कि वे उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और छोटी-छोटी परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने में मदद करें।

