देहरादून। उत्तराखंड के चौमुखी विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अनूठी और दूरदर्शी पहल की है। नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान सीएम धामी ने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े प्रवासी उत्तराखंडियों, नीति-विशेषज्ञों और प्रबुद्धजनों से सीधी बातचीत की। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य देवभूमि की विकास यात्रा में राज्य से बाहर रह रहे प्रवासियों के समृद्ध अनुभवों, वैश्विक दृष्टिकोण और नवाचारी विचारों को जोड़ना रहा।
प्रदेश के विकास की दिशा तय करने में प्रदेश से बाहर रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों की भूमिका को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में प्रवासी बुद्धिजीवियों और विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोगों के साथ संवाद किया। बैठक में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, पर्यटन, निवेश, पलायन, कनेक्टिविटी और सीमांत क्षेत्रों के विकास को लेकर सुझाव सामने आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडियों और प्रबुद्धजनों से मिले सुझावों को नीतियां तैयार करते समय शामिल किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की विकास यात्रा में प्रदेश से बाहर रहने वाले लोगों की विशेषज्ञता और अनुभव उपयोगी साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और प्रवासी उत्तराखंडियों के सुझावों को नीति निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ा जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्यटन, स्वरोजगार, स्थानीय कारोबार और निवेश को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने होमस्टे, छोटे होटल, कृषि और बागवानी जैसे क्षेत्रों को युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के संभावित माध्यम के रूप में रेखांकित किया। धामी ने रिवर्स माइग्रेशन का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार की ओर से इसे गांवों और पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस दिशा में स्थायी रोजगार, बाजार और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता अहम कारक बने हुए हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में बेहतर कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर और हवाई सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। राज्य सरकार की आधिकारिक सामग्री में भी देहरादून, पंतनगर और पिथौरागढ़ को नियमित हवाई सेवाओं से जुड़े केंद्रों के रूप में बताया गया है। धामी ने पंतनगर को कृषि और उद्योग की दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का भी उल्लेख किया। सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई संपर्क के विस्तार को भी विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ा गया। युवाओं से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री ने सरकार की ओर से किए गए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए नकल विरोधी कानून सहित कई कदम उठाए गए हैं। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री द्वारा बैठक में रखे गए सरकारी पक्ष का हिस्सा है। पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने चारधाम, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश का उल्लेख किया। साथ ही खेल और शिक्षा के क्षेत्र में अवसर बढ़ाने तथा सीमांत क्षेत्रों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया। बैठक का प्रमुख संदेश यही रहा कि राज्य से बाहर रह रहे उत्तराखंडियों की विशेषज्ञता, निवेश क्षमता और अनुभव को प्रदेश की विकास प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की जाए। अब इन संवादों में सामने आए सुझावों को नीतिगत स्तर पर कितना स्थान मिलता है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।

